शायरी

भीग रहे हैं हम बरसात हो रही है,
या जुल्फ की उनकी छींटे हैं और रात हो रही है,
कश्मकश से भरा हुआ है आज लम्हा जज्बात का,
कि खामोश हैं लब मगर नज़र से बात हो रही है.
                                    :- सुहानता ‘शिकन’

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