दिल की वो बातें

दिल की बातें दिल में ही रह जाते

तुम से भी तो कह नहीं पातें

 

कह नहीं सकते है तो, ऐसा ही रह जाते

जाने दी तो , न कही खो जाते

 

पहले खुद समचते है इन बातों को

ढूंढे अभी वो दिल को, जिसको एतबार कर लूं

 

अगर दिल को कुछ गहरी चोट लगी है

तो जरूर वो बातें माँ को ही मिटा सकती है

 

अगर गगन को चूने की तमन्ना है,

तो जरूर वो बातें पापा ही समच सकते है

 

अगर वो शक्ति को समाचना है,

तो जरूर वो बातें दादा- दादी को ही समचा सकती है

 

तन्हाईयों की बातें है तो

साथ लेलें दोस्तों को

 

मासूमियत की बातें है तो

सीख लें अपने छोटों से

 

प्रेम की बातों को तो वही समच सकते है

जो अपने दिल में आबाद है और फासलों से अतीत है

 

दिल में और भी बहुत बातें है

जो इस कविता में पूरा नहीं होते !

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