गृह द्रष्टि विचार

तीसरि दसम दृष्टि चौथाई |पंचम नवम दृष्टि अधिआई |
चौथे अष्टम दीख त्रिपादा  |सप्तम देखहिं चारिउ पादा  ||
सब गृह देखहिं एक समाना |विनय करौ श्रीपति भगवाना ||

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