मै जो गीत गाता

मै जो गीत गाता वो उनको न भाता, मगर क्या करूँ ये दिल मुझको रुलाता |

कहाँ प्रेम वाणी ? कहाँ प्रार्थना है ?कहाँ सिद्ध होती जो प्रेम साधना है ?
कहाँ प्रेम रस है ? कहाँ भावना है ?मिलेगें वो क्या वो ऐसी संभावना है ?
मिले प्रेम मूर्ती ये क्या वासना है ?या फिर ह्रदय की ये आराधना है ?
कोई तो कहे कैसी ये कल्पना है ?जीवन है या फिर कोरी जल्पना ?
नही जानता हाय क्या ये विधाता ?मगर क्या करूँ ये सब मुझको सताता ।
मै जो गीत गाता …………………………………..ये दिल मुझको रुलाता |

कहाँ प्रेम वन है ?कहाँ प्रेम सागर ?कहाँ से दिखेगा वो प्रेम का सुधाकर ?
कहाँ प्रेम घट है ?कहाँ प्रेम गागर ?अर्घ्य हो वो कैसा जो खुश हो दिवाकर ?
कहाँ रासलीला ?कहाँ कृष्ण नागर ?करे प्रेम भक्ती वो कहाँ प्रेम चाकर ?
हुआ खुश हो जो प्रेम सरिता नहाकर ?मुदित हो उठा प्रेम कर प्रेम पाकर ?
नही जानता वो कहाँ पर है रहता ?मगर क्यूँ नही कोई मुझसे मिलाता |
मै जो गीत गाता ………………………………….ये दिल मुझको रुलाता |

कभी वेदना घन मुदित हो गरजते |ब्यथित हो नयन अश्रु जल से बरसते |
कभी ख्वाब कोई लगते है अपने |कभी दैव अभिशाप के देखे सपने |
कहीं पर दिखीं आंधियां है गमो की |कही पर चमक प्रेम के कुछ क्षणों की |
कहीं पर उगीं  झाड़ियाँ  वक्रता की |कहीं बाढ़ आयी है मेरी ब्यथा की |
कभीं तो कोई मुझ पर ममता दिखाता ? राम भक्त तोतों की कथा भी सुनाता |
मै जो गीत गाता वो उनको न भाता ,मगर क्या करूँ ये दिल मुझको रुलाता |

2 Comments

  1. manoj charan Manoj Charan 30/07/2013

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