जगजाहिर हो गया

मैं इतना शातिर हो गया I
कि तेरा कातिल हो गया II

इस सीने में भी था दिल कभी,
अब तो मै बेदिल हो गया I

अपने लिए नहीं मोहतरमा,
सब तुम्हारी खातिर हो गया I

दोस्तों ने बहकाया इस कदर,
मै दुश्मनों में शामिल हो गया I

पहचानना अब आसां नहीं मुझे,
धोखाधड़ी में जो माहिर हो गया I

धूर्त,पाजी शब्द कम हैं मेरे लिए,
यह तो अब जगजाहिर हो गया I

विवेकशील, समझदार अब कहाँ,
आजकल “चरन” जाहिल हो गया I

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गुरचरन मेह्ता 

One Response

  1. Muskaan 28/07/2013

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