ओ ! जवान देश के जाग जाईये

ओ ! जवान देश के जाग जाईये।
एक बार देश को फिर बचाईये।।

एक बार फिर यहां, छा गया तिमिर यहां,
विनाश का बजा बजर, पिशाच हो उठे प्रखर,
आंधियां है चल पड़ी, स्वतन्त्रता है हिल पड़ी,
हिल उठे गगन धरा, ये पाप का घड़ा भरा,
डरा-डरा से देश है, प्रचण्ड ज्वाल वेश है,
विदेश को स्वदेश की न आग से जलाईये।।1।।

सर जमी की लाज तो, है गिरफ्त में आज तो,
खून खून हो रहा, हर लम्हा है रो रहा,
रो रहा विधान है, ये हंस रहा जहान हे,
निलाम देश हो रहा, पर जवां तू सो रहा,
हो रहा क्यूं बेखर, तू देश के लिए के लिये संवर,
डगर-डगर में बंसरी प्रीत की बजाईये ।।2।।

जतियों का जोर क्यों, सम्प्रदाय शोर क्यों,
क्षेेत्रवाद के लिये, लोग क्यूं मरे जिये,
हम सदा से एक हैं, मत कहो अनेक हैं,
इस धरा के धीर तुम, स्वतन्त्रा के वीर तुम,
देश पर मरे सभी, घाव हैं हरे अभी,
सर जमी की पीर को न और अब बढ़ाईये।।3।।

कुछ विदेशी ताकते, बदल-बदल के रास्ते,
चाल हैं चला रही, जाल हैं फैला रही,
तोड़ दो उन्हें अभी, मोड़ दो उन्हे अभी,
स्वार्थ भावना को त्याग, जाग रे जवां तू जाग,
नाग भाग पायेना, किसी को काट खायेना,
तू कदम बढ़ाये जा, न होसला घटाईये।।4।।

काम तुम करो वहीं, भाव तुम भरो वहीं,
जो चेतना जगा सके, जो पीढि़यां बचा सके,
समाजवाद के लिये, राष्ट्रवाद के लिये,
रक्तपात रोकिये, विनाश वक्त रोकिये,
जिहाद छेड़ दो अभी, आज मिल उठो सभी,
दबी-दबी जबान से न क्रोध को जताईये।।5।।

तुम्ही हो प्राण देश के, बनो रे त्राण देश के,
करो न अब ठिठोलिया, चलो बनाके टोलिया,
गोलियों के सामने, अरि की बांह थामने,
नहीं तो कल की पीढि़यां, न चढ़ सकेंगी सीढि़यां,
ये बात मैं कहूं तुम्हे, ध्यान से जरा सुने,
अटपटी धुने बजा, न सरगमें लजाईये।।6।।
ओ ! जवान देश के जाग जाईये।
एक बार देश को फिर बचाईये।।

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