शायरी

बेख़ौफ़ होकर सावन सा बरस रहा हूँ मैं,
ज़िन्दगी के आसमान पे तनहा गरज रहा हूँ मैं,
रूमानियत का समंदर है पास मेरे दिल के,
मगर पीने को दो बूंद इश्क की तरस रहा हूँ मैं.
                                      :-सुहानता ‘शिकन’

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