देवता

मै मुस्कुराना चाहती हूँ

लोग ताकने लगते है

दबी दबी हंसती हूँ

लोग काट्ने लगते है

 

आश्मानो से ऊँचा

उड़ना चाहती हूँ

सास बहू के बन्धन

टूटना चाहती हूँ

 

बन्द कमरो मे लोग

खरोचने लगते है

और गलियो मे

भेड़िये नोचने लगते है

 

अब अपने अक्स को

बनाऊ या बचाऊ मै

इस दरिन्दगी से

बनू या लुट जाऊ मै

 

लगता है लोग यहां

कोरी बक्वाश करते है

नारी जहां पूजते है

वहां देवता निवास करते है

3 Comments

  1. ganesh dutt ganesh dutt 03/05/2014
    • rakesh kumar RAKESH 07/05/2014
  2. Rinki Raut Rinki Raut 05/05/2014

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