प्यार की मंजिल

टूट गया था आशियाँ मेरा,
ख़तम हो गई थी मेरी कहानी I
पर मेरी किस्मत ने पंहुँचा दिया वँहा,
जहाँ लिखा था मेरा दाना-पानी II

वो तोहमतें लगाते रहे हम पर,
ओर हम समझते रहे उनकी नादानी I
वक़्त बीता तो फिर लौट कर न आया,
जब आया तो डूब चुकी थी कश्ती पुरानी II

खूब मिली सजा हमें दिल लगाने की दोस्तों,
दिमाग की न सुनी बस दिल ही जो मानी I
जाने वाला तो खवाबों में भी न आया लोटकर,
हाँ पर दे गया जाते जाते ज़फ़ा की निशानी II

हम रोते रहे, सब हँसते रहे दिल तोड़कर मेरा,
दुनिया ने भी की बस अपनी ही मनमानी I
जो पाते हैं प्यार की मंजिल, वे कुछ ओर लोग होंगे,
अब यह शब्द सुन कर भी होती है हमें हैरानी II

हर बात पर देते हो राय तुम बिना सोचे-समझे,
उजाला था तो हमें भी आती थी बातें समझानी I
अंधेरों ने जकड़ लिया मेरे घर को दोस्तों ,
नहीं तो हमें भी आती थी दीवाली मनानी II
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गुरचरन मेह्ता

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