कभी तो

तुम भी हमारे ख्वाबों में आ जाना – कभी तो I
हमसे किये जो वादे वो निभाना – कभी तो II

नज़रों में अपनी गिर कर कैसे जीते हैं ?
ज़रा हमसे भी नज़रें मिलाना – कभी तो I

हरदम ही ये चेहरा मुरझाया सा क्यूँ है ?
संग बैठना हमारे, मुस्कुराना – कभी तो I

सब के सब यहाँ क्यूँ मुझसे लड़ते रहते हैं ?
अजी तिल का ताड़ तुम भी बनाना – कभी तो I

कोशिश करने वाले क्यूँ हारते नहीं ?
इस बात का भी मतलब समझाना – कभी तो I

चाह कर भी तुम हमसे क्यूँ मिलते नहीं हो ?
क्या डर है इस दिल में, बताना – कभी तो I

जुल्फों को घटा काली क्यूँ कहते सभी हैं ?
केसू ये तुम भी अपने बिखराना – कभी तो I

नशा इश्क का चढ़ा तो फिर उतरता क्यूँ नहीं ?
आँखों से तुम भी हमको पिलाना – कभी तो I

दिल की ये बातें क्यूँ दिल में ही रखते हो ?
बदरी सी बन के तुम भी बरस जाना – कभी तो I

मेरा ही घर अंधेरों से क्यूँ भरा पड़ा है ?
रोशनी अपने नूर की ले आना – कभी तो I

आपके बिन ये दिन “चरन” कैसे जीए हैं ?
मेरी ही तरह झुनझुना बजाना – कभी तो I

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गुरचरन मेह्ता 

2 Comments

  1. Muskaan 22/07/2013
  2. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 22/07/2013

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