संघर्ष सदा करना होगा

क्या होगा भविष्य मेरा ? मैं नहीं जानता,
कौन रहेगा साथ मेरे ? मैं नहीं जानता,
कैसा होगा आने वाला पल ? मैं नहीं जानता,
क्या दिखलाएगा आने वाला कल ? मैं नहीं जानता।।

पर मैं जानता हूँ इतना, संघर्ष सदा करना होगा,
जो भी हो बाधायेँ सामने, मुझे उनसे लड़ना होगा,
सजग-चाक-चौबन्द हर पल मुझे रहना होगा,
समरांगण में मुझे तन पर, हर घाव सहना होगा,
भुजायुधों को संभाले, युद्धरत रहना होगा,
हर वार सकूँ संभाल सीने पे, वज्र तो बनना होगा।।

कौन घोंपेगा खंजर पीठ में ? मैं नहीं जानता,
विभीषण कौन बनेगा मेरा ? मैं नहीं जानता,
कौन बनेगा शल्य मेरा ? मैं नहीं जानता,
कौन धर्मराज झूठ बोलेगा ? मैं नहीं जानता।।

पर जानता हूँ इतना, मैं हार नहीं यूं मानूँगा,
जब तक भुज में बल है, समर नहीं यूं थामूंगा,
लड़ूँगा और मरूँगा मैं, क्षत्रिय धर्म को पालूंगा,
विजय मिले या मिले पराजय, फर्क नहीं मैं जानूँगा,
प्रतिज्ञायेँ तोड़ समूची, अब केशव बनना होगा,
मैं जानता बस इतना, संघर्ष सदा करना होगा।।

वृक्षों की ले ओट तीर मारेगा कौन ? मैं नहीं जानता,
समाधिस्थ द्रोण को मारेगा कौन ? मैं नहीं जानता,
घेरेंगे कौन अभिमन्यु को ? मैं नहीं जानता,
शिखंडी रण में बनेगा कौन ? मैं नहीं जानता।।

पर जानता हूँ इतना, चाहे ले कोई वृक्षों की ओट,
वीरता के मद में भरे, निहत्थे पे मारे चाहे कृपाण चोट,
कोई बने फिर ढाल पार्थ की, मन में धारे कपट-खोट,
पहिया उठा फिर टूटे रथ का, कर दूँ दुश्मन को लोट-पोट,
है हिम्मत तो सामने आओ, झेलो बाली की गदा चोट,
भीष्म-द्रोण से काम न चलेगा, अब केशव बनना होगा,
मैं जानता बस इतना, संघर्ष सदा करना होगा।।

दीवारें गेरू की कौन तोड़ेगा ? मैं नहीं जानता,
कब्जा चूसल पर करेगा कौन ? मैं नहीं जानता,
लोंगोवाला को लहू देगा कौन ? मैं नहीं जानता,
शैतानसिंघ अब बनेगा कौन ? मैं नहीं जानता।।

पर मैं जानता हूँ इतना, अब सिंहनाद करना होगा,
रामधुन तो बहुत बजी, अब भैरव-राग बजना होगा,
नेहरुजी को दूर बैठाओ सोंपों सत्ता सरदारों को,
जंग खाय जो पड़ी-पड़ी खनकाओ उन तलवारों को,
जाग अरोड़ा देख नियाजी पुनः, चढ़ाई करता है,
सोये क्यों शैतानसिंघजी ? अब तुम्हें जागना होगा,
एक बार अब तुम्हें, संघर्ष पुनः करना होगा,
मैं जानता बस इतना, संघर्ष सदा करना होगा।।

मनोज चारण

मो. – 9414582964

2 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 20/07/2013
  2. Muskaan 22/07/2013

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