विज्ञानं प्रयोगशाला बनाम प्रेम

यह मानव जीवन है विज्ञानं प्रयोगशाला नही |
यह प्रेम अवलंबन है कोई अग्नि ज्वाला नहीं |

प्रयोगशाला साजसज्जा सुगंध तक सब बना देगी |
कागजो के बाग़ में ही कागजो के गुल खिला देगी |

मगर क्या गुल कागजो के तुफानो को झेल सकते ?
अनवरत वर्षावाद झंझावात से क्या खेल सकते ?

प्रयोगशाला में कभी बन सकता नहीं है प्रेम रस |
भूल कर कोशिश करोगे तो बनेगा हलाहल या विष |

विज्ञानं अविष्कार है पर है कोई अवतार नहीं |
विज्ञानं नव झंकार है पर है सुसंस्कार नही |

अज्ञ कुछ विज्ञानंवादी प्रयोग को ही मानते है |
प्रेमवादी प्रेम करके प्रेम रस पहचानते है |

कोई भी विज्ञानंवादी प्रेम से बचता नहीं |
प्रयोग चाहें लाख हो पर प्रेम बल झुकता नही |

यह धरा क्या ?ब्रह्माण्ड तक विज्ञानं के चमत्कार है |
किन्तु नर किन्नर यक्ष राक्षस देव करते प्यार है |

अवनि अम्बर थल व जल तक विज्ञानं का जयघोष है |
नदी उपवन भू शैल सागर प्रेम में मदहोश है |

विज्ञानंवादी प्रयोग करके कटु सत्य को है बोल देते |
प्रेमवादी सत्य क्या ?सत चित आनंद का रस घोल देते |

विज्ञानं की वाणी कठिन कर्कशता का अंतरजाल है |
प्रेम की भाषा सरल शत्वर्ति का ज्यों थाल है |

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