सकून

मेरी आखो की पलको पर

तुम रात सी द्ल जाती हो

लहर सुहानी लगती है

जब तूम आ जाती हो

मासूम तेरा चेहरा

खूसियो का आगाज है

जिस तरह तुम देख कर

खिल जाती हो

सकून हो तूम मेरा

जूनून पर स्मा बनकर

फिर जगा जाती हो

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