दिलबरी की कोई अदा नहीं होती

दिलबरी की कोई अदा नहीं होती ,
बेखुदी से बढ़कर नशा नहीं होती ,
आना होता है जिसपे ये दिल आ ही जाता है ,
इसमें सोचने समझने को कोई वजह नहीं होती .
                                :-सुहानता ‘शिकन’

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  1. navin 14/09/2013

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