बात अगर सही है तो फिर सीखना भी पडेगा

साथ सभी का निभाना भी पड़ेगा
आये हैं तो फिर जाना भी पड़ेगा
किस, किससे रहेंगे दूर भला इस तरह
किसी को तो हाल-ए-दिल बताना भी पड़ेगा

दुखों का बादल तो छांटना भी पड़ेगा
खुशियों को सभी में बांटना भी पड़ेगा
प्यार करते हैं जिनसे दिल से हम
कभी गल्ती पर उन्हें डांटना भी पड़ेगा

फूलों को तो बगिया में खिलना भी पड़ेगा
दरिया को तो समंदर में मिलना भी पड़ेगा
दर्द ज़माने ने चाहे जितने दिए हों
जीना है तो ज़ख्मों को सिलना भी पड़ेगा

कभी कभी अपनों को कुछ कहना भी पड़ेगा
कहतें हैं तो कभी कभी सहना भी पड़ेगा
जिनसे दूर होना चाहते हैं हम कभी कभी
उनके साथ ही हमें रहना भी पड़ेगा

दीपक में तो ज्योति को जलना भी पड़ेगा
काँटों के रास्तों में अकेले चलना भी पड़ेगा
जंगल के इस राज़ में गुजारा करना है तो
दूसरों के अनुसार हमें ढलना भी पड़ेगा

दिल में गम हैं तो क्या मुस्कुराना भी भी पड़ेगा
दुश्मन है तो क्या गले लगाना भी पड़ेगा
एक बार कहने से जो नहीं समझते उन्हें
हर बार, कई बार,बार-बार समझाना भी पड़ेगा

न सुने कोई सही बात तो चीखना भी पड़ेगा
जीवन रथ दुनिया की सड़क पर खीचना भी पड़ेगा
कोई सीमा नहीं है ज्ञान के सागर की यहाँ
बात अगर सही है तो फिर सीखना भी पडेगा
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गुरचरन मेह्ता 

2 Comments

  1. Muskaan 18/07/2013
  2. ASEET YADAV 13/08/2013

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