मौला…..

                मौला…..
मौला बरस जा करम से ,
दूर से नील गगन के ,
कि तनहा है दिल दीदार चाहिए ,
है वो जिसपे मेरा दिल निसार चाहिए
मौला बरस………….दूर से ……….
(1)सोचा नहीं था इस कदर भी कभी ,
रूप अपना बदल लेगी ज़िन्दगी मेरी ,
दो पल को हंसने के वास्ते मुझे ,
अपनानी होगी उम्रभर की बेबसी,
मौला उतर आ चमन से ,
पंखुड़ी गुलाब की बनके ,
कि तनहा………..है वो…………..
(2)सोया हुआ है मुकदरा मेरा,
सिसकियों के रंग में नहाके ,
कितनों पे होता मेहरबाँ है तू ,
उखड़ा क्यों है मुझसे अदा से ,
मौला मेहरबाँ हो मन से ,
चढ़ता हुआ चाँद बनके ,
कि तनहा………..है वो…………..
(3)नूर सा ज़माने में बिखर जाऊँ मै,
इतना इरादों को मजबूत कर ,
दुनिया मुझे देखे हैरत -ए-नज़र ,
कोई कारनामा यूँ अद्भुत कर ,
मौला सरक आ शमन से ,
चेहरे कि मुस्कान बनके ,
कि तनहा………..है वो…………..
मौला बरस………….दूर से ……….
 :-सुहानता ‘शिकन’

2 Comments

  1. Muskaan 15/07/2013
  2. SUHANATA SHIKAN SUHANATA SHIKAN 16/07/2013

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