उधारी व्याज के चलते बखत की मार के चलते

उधारी व्याज के चलते बखत की मार के चलते
सरे बाज़ार हम रुसवा हुए बाज़ार के चलते

तेरे रहमोकरम पे जो अंधेरे तलघरों में थे
यक़ीनन रोशनी में आ गए अख़बार के चलते

ज़मीनी साज़िशों के और ऊपर की सियासत के
मुसलसल बीच में पिसते रहे घर-बार के चलते

ग़लत रस्ते में हो तुम और हम अपनी जगह पे हैं
बुज़ुर्गों की दिखाई रोशनी की धार के चलते

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