वो शक्स

अपना ही घर फून्क कर हंस रहा है वो शक्स,
लड्का हुं मै इस बात पे गरज रहा है वो शक्स !!

पूजी जाती हैं देवियां यहां ये भूल गया है वो शक्स,
अपने घर की लक्श्मी को पीट कर खुश हो रहा था वो शक्स !!

साथी की एहमियत को न समझा वो शक्स,
प्यार का मतलब भी न समझा वो शक्स !!

जमाने मे हर एक रिश्ते की नीव है भरोसा,
उस नीव को ही कम्जोर करता रहा वो शक्स !!

कमी न की उपरवाले ने खुशियां लुटाने मे,
पर लालच मे हर खुशी खाक करता गया वो शक्स !!

रिश्ते बनते है त्याग और स्मर्पण से ,
अहेन्कार मे सब कुछ जला बेठा वो शक्स !!

13 June 2013

apna hi ghar phoonk kar hans raha tha ek shaks, ladka hun mein is baat par garaj raha tha ek shaks, pooji jaati hain deviyan yahaan yeh bhool gaya wo shaks, apne ghar ki lakshmi ko peet kar hans raha tha wo shaks.
saathi ki ehmiyat ko na samjhaa wo shaks, pyar ka matlab bhi na samjha wo shaks, zamaane me har ek rishte ki neev hai bharosa, us neev ko hi kamjor karta raha wo shaks.

2 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 13/07/2013
    • Muskaan 15/07/2013

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