मुस्कान तुम्हारी

इस देश के रहनुमाओं ने आम जनता के पास क्या छोड़ा है, इस देश का आम नागरिक होने के नाते क्या क्या हमारे पास है और क्या क्या उनके पास है, एक छोटी सी समीक्षा :-
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खुदा भी तुम्हारा, खुदाई भी तुम्हारी – प्रार्थना हमारी
अखबार भी तुम्हारा , सच्चाई भी तुम्हारी – फजीहत हमारी
कलम भी तुम्हारी, स्याही भी तुम्हारी – दवात हमारी
खेत भी तुम्हारे , सिंचाई भी तुम्हारी – कुल्हाड़ी हमारी

रातों की नींद भी तुम्हारी, बिस्तर भी तुम्हारा – तख़्त हमारा
ठेस लगती है जिससे वो नश्तर भी तुम्हारा – दिल हमारा
शासन भी तुम्हारा, कुशासन भी तुम्हारा – आदमी हमारा
घसीटो द्रोपदी को, दुशासन भी तुम्हारा – चीर हमारा

अफज़ल भी तुम्हारा, कसाब भी तुम्हारा – जेल हमारा
क्या लिया, क्या दिया, हिसाब भी तुम्हारा – पैसा हमारा
रावण भी तुम्हारा, कंस भी तुम्हारा – अंश हमारा
चुगता है मोती जो, वो हंस भी तुम्हारा – कौवा हमारा

कौरव तुम्हारे हैं, करण भी तुम्हारा – रण हमारा
चरण भी तुम्हारे, आचरण भी तुम्हारा – मरण हमारा
गठबंधन भी तुम्हारा, संग भी तुम्हारा – मत हमारा
रंग भी तुम्हारा, ढंग भी तुम्हारा – रंज हमारा

रौशनी भी तुम्हारी, उजाला भी तुम्हारा – अन्धकार हमारा
गैया भी तुम्हारी, ग्वाला भी तुम्हारा – भूसा हमारा
समंदर भी तुम्हारा, किनारा भी तुम्हारा – भंवर हमारा
आतंक भी तुम्हारा – इशारा भी तुम्हारा – शव हमारा

सरकार भी तुम्हारी, कुर्सी भी तुम्हारी – चूक हमारी
आसमान भी तुम्हारा, ज़मीं भी तुम्हारी – भूख हमारी
तंत्र भी तुम्हारा, मन्त्र भी तुम्हारा – लोकतंत्र हमारा
अंक भी तुम्हारा, डंक भी तुम्हारा – रंक हमारा

संगमरमर भी हमारा, घिसाई भी हमारी – सिकाई तुम्हारी
बेईज्ज़ती भी हमारी, रुसवाई भी हमारी – कमाई तुम्हारी
शिकवा भी हमारा, गिला भी हमारा – सिलसिला तुम्हारा
जायदाद भी हमारी, किला भी हमारा – ऐश तुम्हारी

विक्रेता भी हमारा, ग्राहक भी हमारे – दूकान तुम्हारी
वोट भी हमारे, नोट भी हमारे – पहचान तुम्हारी
क़र्ज़ भी हमारे, फ़र्ज़ भी हमारे – शान तुम्हारी
दर्द भी हमारे, आंसू भी हमारे – मुस्कान तुम्हारी
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गुरचरन मेह्ता

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