ब्यथा

ब्यथा जीवन की दुर्घटना ,ब्यथा आनी है जानी है |
ब्यथा सर्वत्र विचरण है , ब्यथा अनमिट कहानी है |

ब्यथा कटु सत्य जीवन का , ,ब्यथा विस्फोटकारी है |
ब्यथा संगम सुखाती है , ब्यथा विद्द्वेश्यकारी है |

ब्यथा प्राणी जगत तो क्या चराचर को नचाती है |
नर यक्ष किन्नर देव क्या नारायण तक झुकाती है |

शिव इन्द्र ब्रह्मा विष्णु भी जब ब्यथित होते है |
लख चरित प्राणी चराचर के सब चकित होते है |

ब्यथा की द्रष्टि में कोई न राजा है न महाराजा |
ब्यथा सबको दुखाती है ब्यथा बिन शर्म बिन लाजा |

जो जुड़ चुके परब्रह्म से ऐसे दिव्य संतो को |
ब्यथित होते हुए देखा अर्जुन जैसे भक्तो को |

ब्यथा के वाण से घायल हजारो लोग होते है |
ब्यथा संवेग में आकर हजारों युगल रोते है |

ब्यथा ब्रह्माण्ड में शाश्वत ब्यथा है धरा पर शासक |
ब्यथा दुर्जेय योद्धा है ब्यथा निरंकुसता की  प्रशासक |

ब्यथा तो कंस कृष्णा में न कोई भेद करती है |
ब्यथा लंका में बढती है अवध शिर चढ़के रहती है |

ब्यथा अनुभव कराती है ब्यथा जीना सिखाती है |
ब्यथा भी जन्म जन्मो तक  व्यक्ति के साथ जाती है |

ब्यथा मजहब से बढकर है ब्यथा समभावकारी है |
ब्यथा निरपेक्ष निर्णय है ब्यथा हमको भी प्यारी है |

2 Comments

  1. ashok 13/07/2013

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