फूलों के वजन से

फूलों के वजन से भी डाली को झुकते देखा |
ग़मों के बहार में मुकद्दर को रुकते देखा |
बातों की बात से ही दिल को दुखते देखा |
तन्हाई में कैद मजनुओ को सिसकते देखा |

Leave a Reply