खेत में जोत की कहावतें

(1)

गहिर न जोतै बोवै धान।

सो घर कोठिला भरै किसान।।
{गहरा न जोतकर धान बोने से उसकी पैदावार खूब होती है।}

(2)

गेहूं भवा काहें। असाढ़ के दुइ बाहें।।
गेहूं भवा काहें। सोलह बाहें नौ गाहें।।
गेहूं भवा काहें। सोलह दायं बाहें।।
गेहूं भवा काहें। कातिक के चौबाहें।।

{गेहूं पैदावार अच्छी कैसे होती है ? आषाढ़ महीने में दो बांह जोतने से; कुल सोलह बांह करने से और नौ बार हेंगाने से; कातिक में बोवाई करने से पहले चार बार जोतने से।}

(3)

गेहूं बाहें।

धान बिदाहें।।

{गेहूं की पैदावार अधिक बार जोतने से और धान की पैदावार विदाहने (धान होने के चार दिन बाद जोतवा देने) से अच्छी होती है।}

(4)

गेहूं मटर सरसी।

औ जौ कुरसी।।

{गेहूं और मटर बोआई सरस खेत में तथा जौ की बोआई कुरसौ में करने से पैदावार अच्छी होती है।}

(5)

गेहूं बाहा, धान गाहा।

ऊख गोड़ाई से है आहा।।

{जौ-गेहूं कई बांह करने से धान बिदाहने से और ऊख कई बार गोड़ने से इनकी पैदावार अच्छी होती है।}

(6)

गेहूं बाहें, चना दलाये।
धान गाहें, मक्का निराये।
ऊख कसाये।

{खूब बांह करने से गेहूं, खोंटने से चना, बार-बार पानी मिलने से धान, निराने से मक्का और पानी में छोड़कर बाद में बोने से उसकी फसल अच्छी होती है।}

(7)

पुरुवा रोपे पूर किसान।
आधा खखड़ी आधा धान।।

{पूर्वा नक्षत्र में धान रोपने पर आधा धान और आधा पैया (छूछ) पैदा होता है।}

(8)

पुरुवा में जिनि रोपो भैया।
एक धान में सोलह पैया।।

{पूर्वा नक्षत्र में धान न रोपो नहीं तो धान के एक पेड़ में सोलह पैया पैदा होगा।}

 

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