किसे आवाज़ दें रहीं हैं बेकरारी में

 किसे आवाज़ दें रहीं हैं बेकरारी में ,
गले लगा लूं क्या मैं आकर इस खुमारी में ,
खिले गुलाब से हैं अरमां एक कतारी में
गले लगा ………..किसे ……………….
(1)तलब हो पाने की किसी को लब ये चुप पर रहें,
तो क्या करेंगे दिल धड़क के खुशगवारी में ,
गले लगा ………..किसे ……………….
(2)कोई खड़ा हो बनने साकी मैकसी के लिए ,
तो फिर गुजरते हैं दिन क्यों बेखयाली में ,
गले लगा ………..किसे ……………….
(3)हँसी रखी है दो कदम पे इत्तेफाक की तरह ,
उठा लें पलकें एक दफा दफे हजारी में ,
गले लगा ………..किसे ……………….
(4)कहीं बिठा लिए जो दिल में कि वो मिल न सकेंगे ,

तो फिर दवा ना मिल सकेगा इस बिमारी में,

गले लगा ………..किसे ……………….
खिले ……..गले लगा ……किसे ………
:-सुहानता ‘शिकन ‘

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