सूरज

अपने ही ताप से
पिघला बरस गया
आग की फुहार-सा सूरज

दहकते कोलतार पर
भागते नंगे पैरों को
पता ही नहीं चला

मोटर सवार ने कहा
पैदल चलो तो
लू नहीं लगती !

नंगे पैर ने नहीं सुना–
वर्ना कभी भी वो मोटर
और लू से बदल लेता
रोज़-रोज़ जी पाने की
भट्टी पर
सिकता खौलता अपना
परोसा

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