अब समय के साथ चलना सीखना होगा हमें

अब समय के साथ चलना सीखना होगा हमें

रंग गिरगिट सा बदलना सीखना होगा हमें ।

आस्था का मोल भी क्या कुर्सियों के सामने

थालियों मे छेद करना सीखना होगा हमें  ।

भूख से व्याकुल हैं फिर भी न्याय की दरकार है

वादा करना और मुकरना सीखना होगा हमें ।

हम अन्धेरों के शहन्शाह हैं उजालॉ के फकीर

कत्ल करना बच निकलना सीखना होगा हमें।

प्यार और तकरार में हर चीज जायज है जनाब

तितलियों के पर कतरना सीखना होगा हमें ।

शोहरतों की है तडप अन्धे समन्दर की तरहा

जुर्म की हद से गुजरना सीखना होगा हमें ।

“दास” चेहरा आपका है वक्त का दर्पण खुला

अपनी आंखो मे उतरना सीखना होगा हमें ।

शिवचरण दास

3 Comments

  1. Amarendra 27/06/2013
  2. Bhavana Tiwari Dr.BHAVANA TIWARI 27/06/2013

Leave a Reply