हम खूब जानते हैं

जंग में दुश्मन को हराना – हम खूब जानते हैं
दुनिया से आँखें मिलाना – हम खूब जानते हैं
कौन लगाएगा तेरी कश्ती किनारे नादाँ
अपनी नाव खुद ही पार लगाना – हम खूब जानते हैं

अना को मेरी आपने कुचला है हमेशा
पर स्वाभिमान बचाना – हम खूब जानते हैं

कुछ और बेशक न आता हो हमें, लेकिन
प्यार करना फिर निभाना – हम खूब जानते हैं

कर रहे कोशिश जो तुम अविरल बिना हथियार के
कँहा पर है तुम्हारा निशाना – हम खूब जानते हैं

सुना है फूलों के दोस्त हुस्न के बैरी होते हैं
इश्क की यूँ बातें बनाना – हम खूब जानते हैं

गम के बादल आयेंगे, छंट जायेंगे, डरना नहीं
दुःख में भी हंसना हंसाना – हम खूब जानते हैं

हिमालया की चोटियों से बुलंद हैं इरादे अपने
ग़मों का यूँ बोझ उठाना – हम खूब जानते हैं

अंधों के शहर में राजा काना है तभी तो
गंजों को नाखून बिकवाना – हम खूब जानते हैं

सपनों का मंदिर तोडा है हेमेशा अपनों ने
इसलिए ही अब उनसे दामन चुराना – हम खूब जानते हैं

गर इरादें है नेक उनके तो हम भी बेदिल नहीं
पर पहले फंसाना फिर बहकाना – हम खूब जानते हैं

ठेस लगी थी उनकी बातों से कभी हमें भी “चरन”
इसलिए अब नश्तर चुभाना – हम खूब जानते हैं

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गुरचरन मेह्ता

One Response

  1. ashok 13/07/2013

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