तेरे बिन ये पहला-दिन

तेरे बिन ये पहला-दिन,
सूना-सूना निकला दिन।

सूरज किरनें धूप वही,
फिर भी बदला बदला दिन।

तेरे साये, ढूंढ़ रहा है,
कैसा है ये पगला दिन।

तनहाई के सन्नाटों में,
घूमा झुंझला-झुंझला दिन।

शाम तलक तड़पा यादों में,
फिर मुश्किल से सम्भला दिन।

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