माना है

प्यार की पूजा हमने की है सदा
यार को हमने तो रब – माना है
प्यार करतें हैं हम उनसे प्यार की कसम
इश्क को हमने मज़हब – माना है

उनकी गलतियों को सही करते रहे
उनकी बातों का बुरा हमने कब – माना है

वादा किया है हमने तो निभाएंगे भी हम
प्यार में उनको खुदा हमने जब – माना है

उजाला नापसंद था उन्हें, उनकी खातिर
दिन को भी हमने शब – माना है

कितना कुछ कह डाला था उन्होंने
फिर भी सब कुछ हमने अदब – माना है

किसी की बात पर यकीं नहीं किया हमने
अपनी आँखों से देखा हमने तब – माना है

बढ़ गयी दूरियां तभी से इस कदर
खुद को जमीं उनको हमने नभ – माना है

साथ में नहीं फिर भी संग हैं सदा
खुद को कब उनसे हमने अलग – माना है

जुदा हों भी तो कैसे , यह नियती नहीं “चरन”
हम हैं आँखें तो उनको पलक – माना है

अब तो लगता हैं हमको अजब
जो भी माना गजब – माना है

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गुरचरन मेह्ता 

 

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  1. Muskaan 22/06/2013

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