दिल का खेल

दुनिया देखी सब जग देखा बस यही समझ मे आया,
प्यार दिलो का खेल है रब्बा इन्सानो क रचाया,
जब मन चाहा एक से खेला जब मन चाहा दूजा,
आन्ख मे आन्सु छोड चला वो दिल जिसको दे डाला !!

जो भी सीधा होता जितना उतना ही दुख पाता,
आन्ख का धोखा होता है जब सब सूना हो जाता,
साथ किसी के चलते चलते अजनबी बन जाता,
कल्पना के परे निकलता वो शक्स जिसे अपना तु बनाता !!

कह्ते है दिल तोडने वालो क भी बुरा हाल है होता,
वक्त आने पर उन्हे भी साथी छोड चला है जाता,
दोश है किसका इस खेल मे आन्ख कि या की दिल का,
सामने होता दिल का कातिल फिर भी दिल तु हार जाता !!

कह्ती दुनिया प्यार मे जीना प्यार मे ही मर जाना,
यार बिना सब सूना या ही खरा सोना,
कहती है ‘मुस्कान’ यार दगा देगा ये भी याद रखना,
जब दर्द ही दर्द है खेल मे दिल के फिर क्यो बनना है खिलोना !!

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  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' गुरचरन मेह्ता 21/06/2013

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