घर की गाड़ी

एक कंवारे ने लगाई गुहार,
शादी नहीं हो रही,
पंडितजी कुछ करो बेड़ा लगाओ पार।
पंडितजी ने पतड़ा खोला,
ग्रहों की चाल को टटोला,
और गंभीर स्वर में बोला।
बचा तेरा राहू उलटा है, केतु की दशा है,
और शनि है तेरा नीच,
तू सुबह पीपल, दोपहर खेजड़ी, शाम को बड़ को सींच।
संसद के सीतकालीन सत्र से मानसून सत्र तक
यदि ये कार्य कर पाएगा।
कट जाएगा क्लेश, तेरे विवाह का मुहूर्त निकल आएगा।
आखिर मेहनत रंग लायी, खेजड़ी, बड़ या पीपल की कृपा
से एक सुंदर दुल्हन घर आयी।
नयी नयी शादी को कुछ दिन गए बीत,
और फिर तो वही पुरानी जग की रीत,
रोज-रोज की फरमाइस से लड़का हो गया तंग,
अब तो हर रोज होने लगी जंग।
लड़का गया पंडितजी के पास,
मन में लिए कुछ आस,
जाके कथा कह गया पूरी एक सांस।।
महाराज दुखी हो गया हूँ, कुछ उपाय बताइये खास,
पंडितजी बोले बेटा,
ये गृहस्थी की गाड़ी है, इसको मन लगाकर खींच,
खेजड़ी, पीपल या बड़ से काम नहीं चलेगा,
अब तो इस घर की तुलसी को सींच।
अब तो बस यही टोटका चलेगा,
जितना जिम्मेदार पति, पिता, बेटा बनेगा,
उतना ही तू फूलेगा-फलेगा।।

मनोज चारण

मो. 9414582964

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