ये बूंद बूंद अपनी है

 

ये बूंद बूंद अपनी है ।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

ये देश की माटी अपनी है,
कश्मीर की घाटी अपनी है ।
भगत सिंह वाला सपना,
बापू की  लाठी अपनी है ।
अपना है साऐ आसमान,
ये धरती माता अपनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

ये सारे मज़हब अपनें हैं,
सारी भाषाएँ अपनी है ।
अल्ला,गॉड,या वाहे गुरु
सब देव देवियाँ अपने हैं ।
पहनावे में अलग भले,
पर एक आत्मा अपनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

सावधान रहना उनसे,
गद्दारी जिनका पेशा है ।
जिनकी खराब रहती नीयत,
जिनका मज़हब बस पैसा है ।
उनका तो पर्दाफाश करो,
पुरखे भी जिनके शकुनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

इस देश का कण कण हमारा है,
पर्वत और नदियाँ अपनी हैं ।
दुश्मन जो दावा करे यहाँ,
उनकी गर्दन ही नपनी है ।
ये चारों धाम हमारे हैं,
गंगा की धारा अपनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

उनको भी पहचान रहे,
करते आये जो गद्दारी ।
ऊपर से प्रेम दिखावा है,
पर मन में मैल भरा भारी ।
रोकना है अब उन सबको,
गति उनकी हमें पलटनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

सच्चाई का पथ दिखा रहे,
अर्जुन को सुना रहे गीता ।
वे  कृष्ण हमारे अपने हैं,
है जिधर कृष्ण वह रण जीता ।
रामायण अपना जीवन है,
गायत्री गीता अपनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।
ये बूंद बूंद अपनी है ।।

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गुरचरन मेह्ता 

2 Comments

  1. Muskaan 22/06/2013
  2. पारस सेंगर 20/01/2015

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