शुरू कर दिया

जब से तुमसे मिले न जाने क्या क्या हुआ
मेरे दिल ने तड़पाना – शुरू कर दिया
मैं बहकता नहीं था मगर ओ सनम
इस दिल ने बहकाना – शुरू कर दिया

मेरी बातों में अब गीत बजने लगे
मेरी साँसों में अब सुर सजने लगे
के हमने गुनगुनाना – शुरू कर दिया

पहले रहता था मैं दिल के कमरे में बंद
चेहरा उतरा हुआ मन में चलता था द्वन्द
पर अब मुस्कुराना – शुरू कर दिया

पहले पहले प्यार में ये क्या हो गया
मैं तो पाने चला था पर खुद खो गया
दिल मेरा क्यूँ चुराना – शुरू कर दिया

आँखों ही आँखों में आँखें चार हो गई
जीत के भी लगा जैसे हार हो गई
हमने खुद को समझाना – शुरू कर दिया

ये प्रेम भरी बातें पहले अच्छी लगती हैं और बाद में ः-

कितनी ठोकर लगी कैसी दिल की लगी
मेरे बस की नहीं है अब ये दिल्लगी
जिसे चाहा उसी ने ठुकराना – शुरू कर दिया

नहीं चाहते थे पर इश्क कर ही गए
बदनामी की वजह से हम तो डर ही गए
तुमने इश्तहार जो लगाना – शुरू कर दिया

ना पा ही सके थे तुझे हम ओ साकी
जब मर ही गए “चरन” फिर कसर क्या थी बाकी
जो सबने मिलकर मुझे जलाना- शुरू कर दिया

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गुरचरन मेह्ता 

One Response

  1. Muskaan 19/06/2013

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