अब क्या होगा- अब क्या होगा

अब क्या होगा- अब क्या होगा

सरकारी इस लोकतंत्र में
आम आदमी घिसना है
धरती सारी बिक चुकी
अब आसमान भी बिकना है
एक नई अब चाल बनेगी
एक नया मजहब होगा
अब क्या होगा- अब क्या होगा

ऐसे हैं कुछ वैसे हैं
क्या कहूँ हम कैसे हैं
तंत्र मन्त्र के घिसे पिटे
हम भी तो इनके जैसे हैं
मझदार में सरकारी नैया
रोज़ नया करतब होगा
अब क्या होगा- अब क्या होगा

नलकों में पानी नहीं
सड़कों पर सीवर नहीं
अस्पताल से मिल गई छुट्टी
देखा तो लीवर नहीं
शिकायत का वो परचा भी
कूड़े में कड़कड़ होगा
अब क्या होगा- अब क्या होगा

मौन रहकर गद्दारों जैसे
निभाते रहंगे हम ड्यूटी
किस्मत हमारी रूठ गई
सड़कें टूटी अस्मत लुटी
द्रौपदी है जनता बेचारी
इसी का चीर हरण होगा
अब क्या होगा- अब क्या होगा

आवाज़ बुलंद करनी होगी
देश के लिए मरना होगा
इंसानियत की रक्षा हेतु
विषपान हमें करना होगा
रावण की इस सेना से
रण होगा – अब रण होगा
अब क्या होगा- अब क्या होगा

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गुरचरन मेह्ता 

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