तीर ताने है शिकारी

तीर ताने है शिकारी आड में

और परिन्दे हैं खुले आकाश में ।

दोस्तों को भूलना मुमकिन कहां

दर्द इतना दे गये सौगात में ।

फूल पर उनका हमेशा हक रहा

सिर्फ कांटे ही हमारे हाथ में ।

मर गया एक आदमी फुटपाथ पर

भूख का टुकडा लिये था हाथ में ।

हम अन्धेरे मे भी मन्जिल पायेंगें

सच अगर होगा हमारी बात में ।

“दास” अपने आप मे सिमटो नहीं

कद कभी मिलता नहीं  खैरात में ।

शिव चरण दास

3 Comments

  1. manoj charan Manoj Charan 17/06/2013
  2. Himanshu Srivastava Himanshu Srivastava 17/06/2013
  3. शुभम् श्रीवास्तव 'ओम' Shubham Srivastava 18/06/2013

Leave a Reply