मुझे कुछ याद नहीं

दोस्तों की वो सौगातें – मुझे कुछ याद नहीं
दुश्मनों की वो खैरातें – मुझे कुछ याद नहीं

हंस हंस कर की थी जो कभी हमने
तुमसे वो बातें – मुझे कुछ याद नहीं

तुमने कहा मैंने सुना ओर भूल गया
वो हंसी पल,चांदनी रातें – मुझे कुछ याद नहीं

तुम मिले हम मिले सब था नया नया
पर कैसे कहूँ वो ख़ास मुलाकातें – मुझे कुछ याद नहीं

यूँ लौट कर न आना- – सब कुछ भूल जाना
दिल किसका टूटा और कैसे वादे – मुझे कुछ याद नहीं

सभी से किया है धोखा हमने बारी बारी
अरे! कैसे रिश्ते, कैसे नाते – मुझे कुछ याद नहीं

बेकार का तुम्हारा आना मुस्कुराना,चले जाना
बिन मौसम की वो बरसाते – मुझे कुछ याद नहीं

के मेहनत कर-कर जोड़ी थी एक-एक पाई मैंने
उसने खर्च करा दिए कब हँसते-हंसाते – मुझे कुछ याद नहीं

इश्क का सिलसिला यूँ ही चलता तो अच्छा था
जिन्दगी बिता दी क्या-क्या सुनाते-सुनाते- मुझे कुछ याद नहीं

गैरों ने तो एक बार को फिर भी बक्श दिया
पर अपनों की वो कितनी ही घातें – मुझे कुछ याद नहीं

के तुम भी तड़पोगे एक दिन यूँ ही “चरन”
कुछ ऐसा ही कहा था उसने जाते-जाते – मुझे कुछ याद नहीं

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गुरचरन मेह्ता

One Response

  1. Muskaan 20/06/2013

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