अकेलेपन का ये एह्सास…..

अकेलेपन का ये एह्सास क्यो मिटता नही….

मेरा दर्द मुझसे कुछ यु बयां होता नहीं,
कभी अशिक कभी शायर बना जाता नही !!
वही शामे हैं ये पर क्यों किसी का इन्तजार नहीं,
वही सान्सें हैं ये पर क्यों ली जाती नही !! अकेलेपन का ये एह्सास क्यों मिटता नही….

कभी आन्सु कभी दरिया है पर बेह्ता नहीं,
कभी साया कभी सपना है पर खोता नही !!
जमाने भर को गम है ये खबर हमको है,
क्यो फिर भी अपने दिल पे इख्तियार हमको नही !! अकेलेपन का ये एह्सास क्यों मिटता नही….

बहुत खुशियों से नवाजा है खुदा ने हमको मगर,
जो नही मिला क्यों उसी का गिला जाता नही !!
हजारों लोग है दुनिया मे जिनको प्यार मिलता नही,
दो टूटे दिल मिल जाये फिर इस दुनिया मे क्यों ये खयाल जाता नही !! अकेलेपन का ये एह्सास क्यों मिटता नही….

15 June 2013

2 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' गुरचरन मेह्ता 15/06/2013
    • Muskaan 20/06/2013

Leave a Reply