कविता को समझने के लिए सीने में दिल का होना जरुरी है

जिस तरह पाणीग्रहण के लिए बंधन का होना जरुरी है
जिस तरह इंग्लैंड के लिए लन्दन का होना जरुरी है
जिस तरह गीता उपदेश के लिए यशो-नंदन का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह हर पंक्ति के लिए माँ शारदा-वंदन का होना जरुरी है

जिस तरह नदी संग चलने के लिए धार का होना जरुरी है
जिस तरह सैनिकों संग लड़ने के लिए औजार का होना जरुरी है
जिस तरह नाव संग बहने के लिए पतवार का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह प्यार में संग रहने के लिए ऐतबार का होना जरुरी है

जिस तरह शेर के लिए किसी भी शिकार का होना जरुरी है
जिस तरह जीने के लिए सुखों के अम्बार का होना जरुरी है
कर्त्तव्य के साथ साथ जिस तरह अधिकार का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह नई सुबह के लिए अन्धकार का होना जरुरी है

जिस तरह फूलों के खिलने के लिए बहार का होना जरुरी है
जिस तरह डाकुओं के लिए उनके सरदार का होना जरुरी है
जिस तरह खाने में स्वाद के लिए आचार का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह आत्मा के लिए शुद्ध विचार का होना जरुरी है

जिस तरह हुनर की शिक्षा के लिए फ़न का होना जरुरी है
जिस तरह मन की दीक्षा के लिए तन का होना जरुरी है
जिस तरह हरियाली की रक्षा के लिए वन का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह दोस्ती की परीक्षा के लिए दुश्मन का होना जरुरी है

जिस तरह बनिए की दूकान के लिए उधार का होना जरुरी है
जिस तरह सांप को बचने के लिए फुंकार का होना जरुरी है
जिस तरह जवानो में जोश के लिए हुंकार का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह महबूब से मिलने के लिए इंतज़ार का होना जरुरी है

जिस तरह ज्ञान के लिए संतो का ज्ञानी होना जरुरी है
जिस तरह पीने के लिए रेगिस्तान में पानी होना जरुरी है
जिस तरह बादल के लिए गगन का आसमानी होना जरुरी है
ठीक उसी तरह राजा को प्रजा के लिए दानी होना जरुरी है

जिस तरह नासूर बनने के लिए घाव का होना जरुरी है
जिस तरह पहलवान के लिए दांव का होना जरुरी है
जिस तरह चलने के लिए दोनों पाँव का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह देश-प्रेम के लिए मन में भाव का होना जरुरी है

जिस तरह श्री रामचंद्र जी के लिए हनुमंत जैसे दास का होना जरुरी है
जिस तरह किसी गैर पर नज़र के लिए किसी ख़ास का होना जरुरी है
जिस तरह किसी चीज़ को पाने के लिए हमारी आस का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह नीर की अहमियत के लिए प्यास का होना जरुरी है

जिस तरह बसने के लिए ईट-गारे के मकान का होना जरुरी है
जिस तरह दुनिया के चलने के लिए इंसान का होना जरुरी है
खातिरदारी के लिए जिस तरह मेहमान का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह चेहेरे पर ख़ुशी के लिए मुस्कान का होना जरुरी है

जिस तरह कत्ल करने के लिए किसी कातिल का होना जरुरी है
जिस तरह संभलने के लिए तूफानों में साहिल का होना जरुरी है
जिस तरह सुन्दर मुखड़े के लिए गालों पर तिल का होना जरुरी है
ठीक उसी तरह कविता को समझने के लिए सीने में दिल का होना जरुरी है

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गुरचरन मेह्ता 

4 Comments

  1. Muskaan 16/06/2013
    • Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 17/06/2013
  2. manoj charan Manoj Charan 17/06/2013
    • Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 17/06/2013

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