भरोसा नहीं…

 

मुलाक़ात का भरोसा नहीं
बरसात का भरोसा नहीं
नीयत हो सकती है खराब
औकात का भरोसा नहीं

आदमी है तू आदमी से
कहीं लड़ ना मरे
मुझे तो तेरी
जात का भरोसा नहीं

घर को जल्दी
लौट के आ जाना सनम
ये खबर है कि
हालात का भरोसा नहीं

कौन देगा दगा
और कौन छोड़ देगा
दोस्तों के भी तो
हाथ का भरोसा नहीं

मांगने से पता क्या
मिले ना मिले
तेरे दर से
खैरात का भरोसा नहीं

तेरे भाईयों की गिनती
कभी की भी है तूने
मुझे तो उन
सात का भरोसा नहीं

आ भूल के सभी,
फिर मिलें हम कभी
जिन्दगी की शै फिर
मात का भरोसा नहीं

वक़्त है मरहम
जख्म अपने आप भरते हैं
रो ना दूँ मैं कहीं
जज्बात का भरोसा नहीं

मेरा दिल ले लिया,
मुझको दर्द है दिया
अब तो यारों की
सौगात का भरोसा नहीं

तू होश खो ना देना
मैं जोश खो ना दूँ
दिल मचल ना जाए
रात का भरोसा नहीं

तू कहे तो मैं तुझ पर
यकीं कर लूं “चरन”
मगर तेरी किसी
बात का भरोसा नहीं

_______________________________

गुरचरन मेह्ता 

One Response

  1. Muskaan 11/06/2013

Leave a Reply