गीत – निंदिया के पाँव

निंदिया के पाँव

निंदिया के पाँव चले सपनों की ओर
नयनों से झाँक रही काजल की कोर |

यादों ने करवट ली
खोल दिए नैन,
योवन ने छीन लिया
तन-मन का चैन |

प्रेमिल उन्माद जगा नाचे ज्यों मोर |

साजन के द्वार चली
प्रीति की पतंग,
जीवन की डोर बँधी
प्रियतम के संग |

आँगन में रिश्तों-सी उतरी है भोर |

मौसम ने ऋतुओं के
खोले भुजबन्ध,
अंगों में लहराई
फागुनी सुगंध |

अँगिया को चूम रहा चूनर का छोर |

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  1. admin चन्द्र भूषण सिंह 12/07/2013

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