विधि लेख

विरह वेदना की आंधी में किसका मान रहा था ?
निर्वासित श्री रामचंद्र ने क्या क्या दुःख न सहा था ?
क्या दशरथ जी के नयनो से अविरल अश्रु बहा था ?
या कलंकिनी कैकेई को भी कुछ कष्ट हुआ था ?

निष्कलंकिनी सीता ने भी क्या कुछ पाप किया था ?
या रघुवर ने छोड़ उन्हें क्या कुछ अपराध किया था ?
क्या सहृदय जनता ने भी ममता को छोड़ दिया था ?
रघुकुल के राजतन्त्र ने भी क्या विष का घूट पिया था ?

भरत और रिपुसूदन ने क्या वाणी रोक लिया था ?
या लक्षमण ने छोड़ सीय को भ्रात्र प्रेम का श्रेय लिया था ?
क्या बशिष्ठ जी ने सीता को सुख में विदा किया था ?
रामचंद्र ने भी क्या सिय को मन से अलग किया था ?

लवकुश ने क्या जानबूझ स्वजनों पर वाण चलाया ?
या सिय ने प्रतिशोध दिखाकर रघुकुल को ही झुकाया ?
क्या मुनि बाल्मीक ने भी कुल से कुल को ही लड़ाया ?
पूरे सूर्य वंश ने क्या निज कुल को पहचान न पाया ?

सत्य कहें तो निर्दय विध ने यह एक निर्मम खेल दिखाया |
दोष किसे दें परब्रह्म ने खुद ब्रंदा के सत को डिगाया |
ब्रंदा पति जालंधर ही आगे रावण बनकर आया |
विधना के विधिलेख कह रहे जैसा बोया वैसा पाया |

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