मुझे पुकार लो

मुझे  पुकार लो कभी  तुम मुस्कुराके,

झुकी झुकी सी नज़र से शरमाके.
(1)खिले हुए सूरत-ए- कँवल को दिन बहुत हो चुके ,
हँसे हुए लब- ए- ग़ज़ल को दिन बहुत हो चुके ,
वही अदा का दीदार दें फिर जुल्फ उठाके ,
झुकी …………….मुझे  पुकार  ………………..
(2)गुजर ना जाएँ  दिन हंसी के फिर सबा बनके ,
कभी मिलो तो हमसे आके नयी सुबह बनके ,
छलक उठेंगे दिल के अरमाँ सिसकियाके ,
मुझे  पुकार ……………..झुकी ……………………..
(3)सिले हुए लबों से मैं क्या इकरार करूँ ,
सुलगते जज्बा लेके कब तक मैं इंतज़ार करूँ,
ज़रा सा छूलो आके दिल को तरस खाके ,
झुकी …………….मुझे  पुकार  ………………..

2 Comments

  1. Muskaan 05/06/2013
    • SUHANATA SHIKAN SUHANATA SHIKAN 06/06/2013

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