धोखे में…

जो रखते हैं अपने परिवार को – धोखे में
दोस्ती को धोखे में ओर प्यार को – धोखे में
देश से क्या लेना देना उनको ज़रा सोचो
वो रखेंगे पुरे संसार को – धोखे में

‘मत’ का करना इस्तेमाल, तुम बहुमत देने में
‘मत’ दे मत देना तुम , किसी गद्दार को – धोखे में

साथ निभाने को अपना मजबूर कर देंगे
ले लेंगे तुम्हारे ये, ऐतबार को – धोखे में

कुछ नहीं इनके आगे ये कसाब ये अफज़ल
ये रखेंगे अपनी ही, सरकार को – धोखे में

तुम कितना भी समझो समझदार यहाँ खुद को
पल भर में बना दें उल्लू , होशियार को – धोखे में

अरे ! नाव चलाते वो बीच समंदर में
पर रखते हैं वो तो पतवार – धोखे में

बाहर से भोले हैं, अन्दर से हैं भाले
फिजां बना देंगे ये, बहार को – धोखे में

वादे झूठे, कसमे झूठी सब झूठा झूठा है
क्यूँ चलाते हो ऐसे, व्यापार को – धोखे में

धोखा देना जिनकी फितरत सी बन गई है
अरे ! दे देंगे वो मात, सियार को – धोखे में

बना कर भेजा था जिसने इन्हें इन्सां
कातिल बन कर रखा उस, निराकार को – धोखे में

समझे “चरन” सब सुलझ गया, पर उलझन बाकी है
बदल दिया सब कुछ, शुद्ध विचार को – धोखे में

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गुरचरन मेह्ता

2 Comments

  1. Muskaan 04/06/2013
  2. Gurcharan Mehta 'RAJAT' गुरचरन मेह्ता 05/06/2013

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