जाग्रति फैलायेंगे कवि- विनय भारत

चल पडी आँधी यहाँ
अब कोई रोक ना पायेगा
जला चुका हूँ मैं दीपक
वो रोशनी कर जाएगा
बुझने ना देगा जो प्रकाश
कोई ऐसा वीर आयेगा
मेरे दीपक की इस लौ से
कोई दीप से दीप जलायेगा!

कवि- विनय ‘भारत’

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