अहन्कार

तन्हाइयो मे जीना अपने अहम के कारण जिन्हे अच्छा लगता है,
खुद ही जल जाते है उस आग मे जिसे हवा वो देते हैं !!

अपने ही घर की खुशियो को बाहर का रास्ता दिखाते है,
अहंकार ए दुश्मन को घर मे बसा लेते है !!

जिन्हे कदर नही रिश्तो की स्वार्थ मे जीते है,
वो तन्हा ही रहते है उमर भर इल्जाम दूसरो को देते है !!

न था कुछ तेरा यहां, न रहेगा तेरा कुछ यहां,
फिर क्यो झूठे अहम मे परिवार बिखर जाते है !!

अहंकार खा जाता है इन्सान की समझ को,
जो खुद को जलाकर रोशन करते है अपने अहम की शमा को !!

31 MAY 2013

3 Comments

  1. Gurcharan Mehta 'RAJAT' Gurcharan Mehta 01/06/2013
    • Muskaan 01/06/2013
  2. Amit Saxena 02/07/2013

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