मेरी माँ

एहसास मुझको है अनेकों ,अनगिनत अनुभूतियाँ

है  अनोखी  पुलक  भरी , ह्रदय  में  स्मृतियाँ

स्नेहिल स्मरण से भरे हैं ,ये मेरे मन और प्राण

हे माँ तुम्ही से है भरे, उर में सपनों की जहान

यादों के घन –सघन ,जब उमड़ पड़ते पलक- पर

वहीँ से है  बरस पड़ते,नयन के आसमा मचल-कर

जीवन विकल होती  अगर तो ,याद  होती  है दवा

तुम्हारे स्नेह की आँचल ,हमें देती यूँही शक्ति –सदा

हर चोट में हर क्षोभ में, केवल तुम्ही हो माँ

लगता सदा ऐसा हमें , हमारे पास तुम हो माँ

छोटी –बड़ी गलती हुई हो ,या कोई अपराध सा

तुमने किया हरदम क्षमा ,देकर नयी कुछ सीख सा

आज मै भी माँ बनी हूँ ,तेरे गम को जानती हूँ

तेरी पीड़ा को समझ कर, सर झुकाना चाहती हूँ

भारती दास

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