तुम्हे याद होगा कि :-

तुम्हे याद होगा कि :-
तुम दूसरों के अवगुणों से कितना नफरत करते हो,
पर क्या किसी के गुणों को कभी अपने अन्दर डालने की कोशिश की है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
तुम सबकी खुशियों, सभी के सुख में बराबर के हिस्सेदार रहे हो,
पर क्या कभी किसी के दुःख में भी हिस्सा बने हो ?
तुम्हे याद होगा कि :-
तुम दूसरों की बेवकूफियों पर कितना हँसते हो,
पर क्या कभी किसी रोते के आंसू पोंछे हैं ?
तुम्हे याद होगा कि :-
एक सम्पन्न परिवार से सम्बन्ध होने के कारण तुम कभी भूखे नहीं सोये,
पर क्या कभी किसी भूखे को खाना खिलाया है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
तुम्हारे माँ-बाप ने आज तक तुम्हारी हर इच्छा को पूरा किया है,
पर क्या तुमने कभी उनकी किसी अभिलाषा की ओर ध्यान दिया है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
एक दिन परिवार के किसी सदस्य से झगड़ा होने के कारण तुमने खाना नहीं खाया था,
पर क्या कभी सोचा है की उस दिन किस-किसने खाना नहीं खाया था ?
तुम्हे याद होगा कि :-
बचपन से आज तक तुम्हारे पास कपड़ों की कभी कोई कमी नहीं रही,
पर क्या कभी कपड़े के किसी छोटे से टुकड़े से किसी नंगे बदन को ढांकने की कोशिश की है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
सर्दी की ठंडी रातों में तुम दुबक कर रजाई में सो जाते हो,
पर क्या कभी किसी ठण्ड से ठिठुरते को ठण्ड से बचाया है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
गर्मियों में तुम कितनी ही ठंडी-ठंडी चीजों का सेवन कर अपनी प्यास बुझाते हो,
पर क्या कभी किसी प्यासे को पानी पिलाया है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
तुमने कितने ही बड़े-बड़े काम किये हैं, अपने लिए,
पर क्या कभी किसी का कोई छोटा सा काम किया है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
तुमने कभी किसी का बुरा नहीं किया,
पर क्या कभी किसी के लिए कुछ अच्छा किया है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
तुम जब मंदिर मस्जिद जाते हो, सदा अपने लिए कुछ मांग कर आते हो,
पर क्या भगवान् से किसी और के लिए भी कभी तुमने कुछ माँगा है ?
तुम्हे याद होगा कि :-
उस दिन जब तुम्हारी बात को बीच में ही काट दिया था, तो तुम कितना गुस्सा हुए थे,
पर क्या तुमने कभी किसी की बात ध्यान से सुनी है ?

इन सब बातों का निचोड़ केवल इतना ही है कि:
है काम आदमी का ओरों के काम आना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज जाना.

ओर अंत में केवल यही कहना चाहता हूँ :
अगर आप अपने आप को समझदार समझतें हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं
पर अगर आप सामने वाले को बेवकूफ समझतें हैं
तो शायाद यह आपके लिए अच्छा न हो.

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गुरचरन मेह्ता 

 

 

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