हँसना हँसाना सीख ले…

नफरत से भरे इस जहाँ में रूठे यार मनाना सीख ले…
दुःख से भरे लोगों में कुछ हँसना हँसाना सीख ले…
जीना है अगर इस दुनिया में बन कर  कुछ तो
प्यारे अर्जुन की तरह तीर चलाना सीख ले…
दुःख से भरे लोगों में कुछ हँसना हँसाना सीख ले…

कहतें नहीं जुबां से, रखते हैं दिल में कुछ ऐसे राज होते हैं
सुनते नहीं किसी की उड़ते है आकाश में, बाज़ होते हैं
सर झुका कर चलना छोड़ दे अब तो ए दोस्त मेरे
जो चलते हैं सर उठा कर, उन्ही के सर पर ताज होते हैं
इसलिए ही कहता हूँ सर झुका कर नहीं बल्कि
सर उठा कर चलना-चलाना सीख ले…
दुःख से भरे लोगों में कुछ हँसना हँसाना सीख ले…

कहतें हैं इंसान बुराइयो का पुतला है, पर हर कोई खराब तो नहीं होता
देखें हैं बड़े-बड़े रहीस हमने भी, पर हर कोई नवाब तो नहीं होता
इंसान हिंदी का नहीं बल्कि इंग्लिश का फूल है
आती है सदा फूलों से खुशबु पर हर फूल गुलाब तो नहीं होता
अरे ! फूलों की तरह इस बगिया में
जरा खिलना-खिलाना सीख ले…
दुःख से भरे लोगों में कुछ  हँसना हँसाना सीख ले…

जो बीत गए उन लम्हों को याद कर क्यूँ अपने को सताता है
जिन्दगी बेवफा हो जाती है जब मौत से सामना हो जाता है
क्यूँ गिर रहे हैं अपनी ही नज़रों हम एक दुसरे से झूठ बोलकर
सच्चाई से कोई जीत नहीं सकता, सच एक दिन सबके सामने आता है
गिर कर संभलने की कोशिश छोड़ दे
अपनी नज़रों में कुछ उठना-उठाना सीख ले…
दुःख से भरे लोगों में कुछ हँसना हँसाना सीख ले…

इससे लिया, उसको दिया, अरे क्या किया, कहाँ ले जाएगा
इसको लूटा , उसको लूटा, अरे क्या लूटा, खुद भी लुट जाएगा
कहता था कुछ नहीं है दुनिया के अन्दर,खाली हाथ गया सिकंदर
जप ले राम का नाम, अरे मुर्ख! वरना एक दिन पछतायेगा
राम का नाम है चारों धाम, इसलिए
राम-नाम जपना-जपाना सीख ले…
दुःख से भरे लोगों में कुछ हँसना हँसाना सीख ले…

जीना है अगर इस दुनिया में बन कुछ तो
प्यारे अर्जुन की तरह तीर चलाना सीख ले…

दुःख से भरे लोगों में कुछ हँसना हँसाना सीख ले…

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गुरचरन मेह्ता

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