सवाल

सवाल

आज हर कोई सवाल पूछ रहा
उनमें में भी एक हूँ
मेन भी वही सवाल पूछ रहा
ये सवाल पहले भी पूछे जा रहे थे
आज भी पूछे जा रहे
सवाल करने वाले अनेक
जबाव देने वाला कोई नहीं
सिर्फ टालम टोल
ये वो सवाल है
जिनका उत्तर किसी किताब में नहीं
समाचार पत्रों में भी नहीं
वो भी सवालों से ही भरे पड़े
बड़े बड़े शास्त्रों के ज्ञाता
प्रवचन देने में वो मस्त
नम्बर पाने की होड़ में लगे पड़े
घुम फिर के एक ही बात
आखिर सवाल क्या है ?
सवाल पूछने का मकसद क्या है ?
सवालों का ही ढेर है
जबाव सिमटे पड़े
अनुभव से मिल सकते
हाँ कहीं उत्तर पा भी गए
लोग हैं की मानते नहीं
आखिर सवाल यह उठता है
सवालों के जबाव कहाँ मिलेंगे
उन्हीं को ढूंढना है
खोजना शुरू करोगे
सवाल और जबाव हृदय में बसे
जो सारे जबावों की गंगा लगती
जिसमें डूब कर देखो
जबाव सारे वहीं मिलेंगे

अनुज भार्गव

Leave a Reply