आओ दिवाली मनाएं

आओ आओ,
आओ भाई आओ आओ दिवाली मनाएं
अपने घर में रोशनी के लिए पड़ौसी का घर जलाएं
आओ भाई….

आओ मंदिर मस्जिद चर्च को तोड़े ओर तोड़े गुरुद्वारा
इंसानियत की बलि चढ़ा दें गर्दन पर रखकर आरा
आओ गंगा को गन्दा कर दें पानी कर दें खारा
अरे! आओ मिलकर खा जायें हम जानवरों का चारा
अपने बच्चो के सर मढ़ दें हम अपनी अपनी बलायें
आओं भाई …..

आओ पैसों की खातिर करवा दें हम कोई दंगा
आओ पैसो की खातिर हम देश से ले लें पंगा
आओ पैसो की खातिर इंसान को कर दें नंगा
आओ पैसो की खातिर फाड़ दें हम तिरंगा
आओ पैसो की खातिर हम क्या से क्या हो जायें
आओ भाई …..

आओ किसी भूखे को हम घर से फिर दुत्कारें
आओ तोड़ दें दिल की दिल से मिलती जुलती तारें
आओ रावण बन जायें ओर राम को हम फिर मारें
आओ दुशासन बन जायें द्रौपदी के वस्त्र उतारें
राह चलें दुर्योधन की हम तान लें अपनी भुजाएं
आओ भाई …..

आओ होली के रंगों को खून से कर दें लाल
भूसा भर दें देश के अन्दर खींचे उसकी खाल
आओ नेता बन जायें हम खायें देश का माल
आओ लूटें देश को अपने – बिछाएं फिर कोई जाल
हाल बेहाल करें देश का दौलत खूब कमायें
आओ भाई …..

आओ, आओ, आओ देश को रगड़-रगड़ दें हम
सर काट कर अपनों का माला में जड़ दें हम
आओ दिवाली के दीयों को खून से भर दें हम
खातें हैं जिस थाली में, उसी में छेद कर दें हम
आओ, आओ, आओ कुछ इस तरह त्योंहार मनाएं
आओ भाई …….

आओ भगत सिंह फांसी लटकाएं, गाँधी को मारे गोली
आओ पटेल को लाठी मारें खेलें खून की होली
आओ चन्द्रशेखर की मुखबरी कर,  देखें आँख मिचौली
आओ बसन्ती चोला फाड़े राख से भर दें झोली
आओ, आओ, आओ फिर से देश को गुलाम बनायें
आओ भाई ……

आओ भाई आओ आओ दिवाली मनाएं
अपने घर में रोशनी के लिए पड़ौसी का घर जलाएं
आओ भाई….

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गुरचरन मेह्ता

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