क्या बुरा किया

प्रेमी प्रेमिका से :-

तेरे प्यार में दिल गंवाया – क्या बुरा किया
तुझे मन-मंदिर में बिठाया – क्या बुरा किया
तुझे चाहा – तुझे सराहा – तुझे पूजा
तेरे सजदे में सर झुकाया – क्या बुरा किया

तुम्हारी जिन्दगी को हमने एक नया मोड़ दिया – क्या बुरा किया
खुशी वाली चुनरी को तुम्हारे ऊपर ओढ़ दिया – क्या बुरा किया
ख़वाब और सच्चाई में बहुत फर्क है जानां
वादा निभा नहीं सकते थे, तो तोड़ दिया – क्या बुरा किया

जब भी रोये तुम, तुम्हे कन्धों का सहारा दिया – क्या बुरा किया
तुम्हारी डूबती कश्ती को सदा किनारा दिया – क्या बुरा किया
बन कर रहे हम सदा तुम्हारे ही बस
जां हथेली पर रख दी, जब-जब तुमने इशारा दिया – क्या बुरा किया

माता -पिता अपने बेटे से :-

4th ग्रेड में रहे पर तुम्हे अफसर बनाया – क्या बुरा किया
खुद भूखे रहे पर तुम्हे खिलाया – क्या बुरा किया
पढ़ते थे तुम रात में और जागते थे हम रात भर
मुश्किलों में सदा तुम्हारा हौंसला बढ़ाया – क्या बुरा किया

कि पत्थर तराश तराश कर तुम्हे हीरा बनाया – क्या बुरा किया
नीम से कड़वे थे तुम, तुम्हे शीरा बनाया – क्या बुरा किया
जिन्दगी से कहीं हार न मान जाओ तुम
इसलिए ज़माने से तुम्हे लड़ना सिखाया – क्या बुरा किया

जब भी की गल्ती तुमने, तुम्हे समझाया – क्या बुरा किया
हकीकत का तुम्हे आइना दिखाया – क्या बुरा किया
तुम्हारे सपने न हो जाएँ कहीं चूर-चूर “चरन”
कौन अपना, कौन पराया, बस इतना बताया – क्या बुरा किया
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गुरचरन मेहता

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